बुधवार 24 जून 2026 - 20:34
वर्तमान समाज के लिए हज़रत सय्यद उश शोहदा (अ) के आंदोलन का संदेश और सबक

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मुन्तज़री मुक़द्दम ने कहा: हज़रत सय्यद उश शोहदा इमाम हुसैन (अ) के व्यक्तित्व को आशूरा से अलग करके नहीं समझा जा सकता। आशूरा केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक संस्कृति-निर्माता और विचार-निर्माता तत्व है, जो व्यक्तियों और समाजों को सुस्ती और संवेदनहीनता से निकालकर उत्साह, उद्देश्य, स्वतंत्रता और जीवंतता की ओर ले जा सकता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के संवाददाता से बातचीत में इमाम ख़ुमैनी (र) संस्थान की शैक्षिक समिति के सदस्य हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन हामिद मुन्तज़री मुक़द्दम ने इमाम हुसैन (अ) के आंदोलन के संदेशों और शिक्षाओं को नए सिरे से समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मुहर्रमुल हराम के दिनों और रातों में हज़रत सय्यद उश शोहदा (अ) के व्यक्तित्व की सही व्याख्या से ग़ाफ़िल नहीं होना चाहिए। यह वह महान व्यक्तित्व है जिसने सांसारिक हितों को त्यागकर ईश्वरीय उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बलिदान और त्याग का मार्ग चुना।

उन्होंने कहा कि जितना अधिक इमाम हुसैन (अ) के आंदोलन पर चिंतन और चर्चा की जाएगी, उतनी ही गहराई से मनुष्य इस महान आंदोलन को समझ सकेगा। इस समझ की गहराई, इमाम हुसैन (अ) के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक संबंध को और अधिक मजबूत तथा स्थायी बनाती है।

वर्तमान समाज के लिए इमाम हुसैन (अ.) के आंदोलन का संदेश और सबक

क़ुम के हौज़ा-ए-इल्मिया के इस शिक्षक ने आगे कहा कि इमाम हुसैन (अ) का व्यक्तित्व सबसे अधिक उनके इस महान और अमर आंदोलन से जुड़ा हुआ है और उन्हें उनके आंदोलन, उनकी क्रांति और आशूरा की घटना से अलग नहीं किया जा सकता। इसलिए उनके व्यक्तित्व को आशूरा की घटना के आलोक में ही समझना और उसकी व्याख्या करना चाहिए।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मुन्तज़री मुक़द्दम ने कहा कि आशूरा की घटना केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है। यह इमाम हुसैन (अ) के व्यक्तित्व को समझने का केंद्रीय बिंदु है, लेकिन यह घटना इतिहास की सीमाओं में कैद नहीं रही। यह एक संस्कृति-निर्माता और विचार-निर्माता तत्व बन गई है, जिसमें उच्च मानवीय संदेश निहित हैं।

इमाम ख़ुमैनी (र) संस्थान की शैक्षिक समिति के सदस्य ने कहा: “हुब्बुल हुसैन यजमअुना” एक ऐसी वास्तविकता है जो एकता और सामंजस्य को जन्म देती है। हम सभी हज़रत सय्यद उश शोहदा (अ) के ख़ेमे के नीचे एक परिवार की तरह हैं। जैसा कि शहीद सरदार हाजी क़ासिम सुलेमानी ने कहा था, “हम इमाम हुसैन की उम्मत हैं।” यह दृष्टिकोण आपसी समन्वय, एकता और मतभेदों से ऊपर उठने का आधार बन सकता है।

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